सच भी अब झूठ की डटकर कसम खाने लगे
सांप भी ज़रा देख लो खादी पहन आने लगे
भूख के दलदल में बैठे इक तड़पते देश को
वायदों की रोटियों का ख्वाब दिखलाने लगे
जो बिक गई थी रात को मजबूरियों के हाट में
उसके बदन पे राजनितिक रंग चढ़वाने लगे
मेरा ईश भी देखो ज़रा पार्टियों में बट गया
गीता कुरआन में रख के अब एजेण्डे बिकवाने लगे
सांप भी ज़रा देख लो खादी पहन आने लगे
भूख के दलदल में बैठे इक तड़पते देश को
वायदों की रोटियों का ख्वाब दिखलाने लगे
जो बिक गई थी रात को मजबूरियों के हाट में
उसके बदन पे राजनितिक रंग चढ़वाने लगे
मेरा ईश भी देखो ज़रा पार्टियों में बट गया
गीता कुरआन में रख के अब एजेण्डे बिकवाने लगे
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