फ़िका फ़िका सा बदरंग उसका लिबास है,
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है
अफसोस के आईने से झाकता वो ATM का गार्ड
80 की उमर मे वो गॅरों के पास है
मुझमे क्या ढुंढता वो मै जानता नही
शायद किसी अपने की था परछाई ढुंढता,
हर गलत बात पे मुझको था टोकता
कोई खेल ले उसकी गोद मे, उन आखों की आस है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है
मुश्किल से याद थे वो गांव वो बगीचे,
आंखो मे बच्चे थे या आंगन के दरीचे
मुझको छोटी मुनीया की करतूत बताता
हर बात पे लगता था वो कोई दर्द छुपाता
गॅरों मे उसको अपनों की तलाश है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है
अफसोस के आईने से झाकता वो ATM का गार्ड
80 की उमर मे वो गॅरों के पास है
मुझमे क्या ढुंढता वो मै जानता नही
शायद किसी अपने की था परछाई ढुंढता,
हर गलत बात पे मुझको था टोकता
कोई खेल ले उसकी गोद मे, उन आखों की आस है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है
मुश्किल से याद थे वो गांव वो बगीचे,
आंखो मे बच्चे थे या आंगन के दरीचे
मुझको छोटी मुनीया की करतूत बताता
हर बात पे लगता था वो कोई दर्द छुपाता
गॅरों मे उसको अपनों की तलाश है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास
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