Friday, 24 April 2015

उसे पागल ना कहे तो ऑर क्या कहे

उसे पागल ना कहे तो ऑर क्या कहे , 
वो पत्थरो के शहर मे आईने तलाशता था

Wednesday, 8 April 2015

एक शेर

सब सबुत भी दे रहे थे अपनी बेगुनाही का...
मॅ इकरार ना करता तो ऑर क्या करता

Friday, 11 April 2014

कतरा भरोसा करे भी तो किस पे करे

कतरा भरोसा करे भी तो किस पे करे 
दरिया ने तो समंदर से दोस्ती कर लि

अंधेरो को पुजने का चलन ऍसा बढा 
दियो ने सरे राह खुद्खुशी कर ली

Thursday, 23 January 2014

मेरी खमोशी मेरा जवाब नही, मेरा मुकद्दर है

मेरी खमोशी मेरा जवाब नही, मेरा मुकद्दर है 
जमाने ने अक्सर गलत सवाल किया मुझपे

मै आशिक बना, पागल बना शायर बना 
ईक मुहब्बत ने क्या क्या कमाल किया मुझपे

किस कौम के तुम हो जरा ये भी बता दो,

किस कौम के तुम हो जरा ये भी बता दो,
जुर्म भी करते हो  बड़ी दिल्लगी के साथ

धर्म ग्रंथो ने मुझे हिन्दु मुसलमान लिख दिया

धर्म ग्रंथो ने मुझे हिन्दु मुसलमान लिख दिया, 
लकीरों मे किसे के आरती किसी के अज़ान लिख दिया 
मैने कर ली है बगावत मॉलवी से भी पंडित जी से भी
नवजात भारत का नाम इंसान लिख दिया

टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है

फ़िका फ़िका सा बदरंग उसका लिबास है,
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है
अफसोस के आईने से झाकता वो ATM का गार्ड
80 की उमर मे वो गॅरों के पास है
मुझमे क्या ढुंढता वो मै जानता नही
शायद किसी अपने की था परछाई ढुंढता, 
हर गलत बात पे मुझको था टोकता

कोई खेल ले उसकी गोद मे, उन आखों की आस है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है

मुश्किल से याद थे वो गांव वो बगीचे, 
आंखो मे बच्चे थे या आंगन के दरीचे
मुझको छोटी मुनीया की करतूत बताता
हर बात पे लगता था वो कोई दर्द छुपाता

गॅरों मे उसको अपनों की तलाश है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास