Friday, 11 April 2014

कतरा भरोसा करे भी तो किस पे करे

कतरा भरोसा करे भी तो किस पे करे 
दरिया ने तो समंदर से दोस्ती कर लि

अंधेरो को पुजने का चलन ऍसा बढा 
दियो ने सरे राह खुद्खुशी कर ली

Thursday, 23 January 2014

मेरी खमोशी मेरा जवाब नही, मेरा मुकद्दर है

मेरी खमोशी मेरा जवाब नही, मेरा मुकद्दर है 
जमाने ने अक्सर गलत सवाल किया मुझपे

मै आशिक बना, पागल बना शायर बना 
ईक मुहब्बत ने क्या क्या कमाल किया मुझपे

किस कौम के तुम हो जरा ये भी बता दो,

किस कौम के तुम हो जरा ये भी बता दो,
जुर्म भी करते हो  बड़ी दिल्लगी के साथ

धर्म ग्रंथो ने मुझे हिन्दु मुसलमान लिख दिया

धर्म ग्रंथो ने मुझे हिन्दु मुसलमान लिख दिया, 
लकीरों मे किसे के आरती किसी के अज़ान लिख दिया 
मैने कर ली है बगावत मॉलवी से भी पंडित जी से भी
नवजात भारत का नाम इंसान लिख दिया

टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है

फ़िका फ़िका सा बदरंग उसका लिबास है,
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है
अफसोस के आईने से झाकता वो ATM का गार्ड
80 की उमर मे वो गॅरों के पास है
मुझमे क्या ढुंढता वो मै जानता नही
शायद किसी अपने की था परछाई ढुंढता, 
हर गलत बात पे मुझको था टोकता

कोई खेल ले उसकी गोद मे, उन आखों की आस है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास है

मुश्किल से याद थे वो गांव वो बगीचे, 
आंखो मे बच्चे थे या आंगन के दरीचे
मुझको छोटी मुनीया की करतूत बताता
हर बात पे लगता था वो कोई दर्द छुपाता

गॅरों मे उसको अपनों की तलाश है
टुटी फुटी सी आज उसकी मगही उदास

सांप भी ज़रा देख लो खादी पहन आने लगे

सच भी अब झूठ की डटकर कसम खाने लगे 
सांप भी ज़रा देख लो खादी पहन आने लगे 

भूख के दलदल में बैठे इक तड़पते देश को 
वायदों की रोटियों का ख्वाब दिखलाने लगे 

जो बिक गई थी रात को मजबूरियों के हाट में 
उसके बदन पे राजनितिक रंग चढ़वाने लगे 

मेरा ईश भी देखो ज़रा पार्टियों में बट गया
गीता कुरआन में रख के अब एजेण्डे बिकवाने लगे

फैज़ साहब को मेरा सलाम

हम देखेंगे 
कबतक जेलों के साए में 
नारे तोडे जाएँगे 
हम देखेंगे , 
वो सुबह की जिसकी आहट पे
नफरत के 
पैमाने तोड़े जाएंगे
हम देखेंगे 
आंसू के तीरों से 
जुल्मत के मंसूबों पर 
निशान साधा जाएगा 
हम देखेंगे
वो दिन होगा और हम होंगे 
और साथ फजाए आएंगी 
तेरे मीनारों पे चढ़कर हम 
किस्मत का रुख तक मोडेंगे
हम देखेंगे
तू लाख दुआ कर रब से पर 
तेरा गुम्बद धाया जाएगा
मजलूमों के नारों से 
जेहन तक थर्राएग 
या तुम होगे 
या हम होंगे बस
इतना होगा वादा है 
अब दोनों ओर तलवारें 
और सर तक जोड़े जाएँगे
हम देखेंगे

देश के मुखिया है कुछ बोलिए जनाब

देश के मुखिया है कुछ बोलिए जनाब 
जनता जवाब मांगती लब खोलिए जनाब 

कबतक विदेशी साडी में सर छुपाएगे 
या शर्म सब गंगा में जाकर धो लिए जनाब

दूम हिलाने के लिए कुत्ते है पालते 
या आप भी संग उनके हो लिए जनाब 

सबके निजी स्वार्थ से ऊपर ये देश है 
पार्टी को देश से मत तोलिये जनाब

जाओ सत्ता वालो से कह दो आम आदमी जाग गया

धर्म बिका देश बिका सत्ता के गलियारो मे 
गान्धी जी को टांग दिया खून लिपि दिवारो मे 
जनता की लाशों पर संसद सत्र चलाते है 
राम नाम की ओ्ढ्नी मे खूनी खेल रचाते है
लोकसभा को शर्म नही है अपने चाटुकारो पर
बुद्धिजीवी चुप बैठे है भ्रष्ट हुई सरकारो पर 
कही हिमाला पिघल गया है दर्द भरी चित्कारों से
भीष्म प्रतिज्ञI तोड चुके है लडने सब मक्कारो से 
सत्य धर्म और त्याग से डरकर अंग्रेजो का राज गया
जाओ सत्ता वालो से कह दो आम आदमी जाग गया

तन्हाई में अपना शहर सब याद आता है

तन्हाई में अपना शहर सब याद आता है , 
मुजफ्फरपुर लीची का शज़र सब याद आता है 

जहा देखे थे हमने साथ रहने के कई सपने 
उसका साथ और वो दोपहर सब याद आता है 

गली में जहा बचपन में ही हम राजा रानी थे 
वो बालू से बना महल सब याद आता है

ग़ज़ल तनहा ,गीत कही गुमनाम हो जाए

ग़ज़ल तनहा ,गीत कही गुमनाम हो जाए , 
अदब-ओ-महफ़िल शेर से वीरान हो जाए
लिखो की मीर को जौक को उम्मीदे बहुत थी 
हर हर्फ़ रौशनी का उन्वान हो जाए

पुकारा जा रहा है फिर से कत्ल होने को

पुकारा जा रहा है फिर से कत्ल होने को 
हम ही हम खडे मकतल मे कत्ल होने को

कही सर की गिनती मे,तीर कम ना पड जाए
शहर सारा आ रहा है कत्ल होने को

हमे ये गम नही की मौत से फिर सामना होगा
तुम देख लो तॅयार हो क्या कत्ल होने को

मेरे कातील से कहना वक्त नया सुरज तराशेगी
अभी जंग बाकी है फिर मिलेंगे कत्ल होने को


मुझे मालुम है ऐ जिंदगी की जंग लाजिम है , 
कफ़न तैयार रखना जा रहे है कत्ल होने को