तन्हाई में अपना शहर सब याद आता है ,
मुजफ्फरपुर लीची का शज़र सब याद आता है
जहा देखे थे हमने साथ रहने के कई सपने
उसका साथ और वो दोपहर सब याद आता है
गली में जहा बचपन में ही हम राजा रानी थे
वो बालू से बना महल सब याद आता है
मुजफ्फरपुर लीची का शज़र सब याद आता है
जहा देखे थे हमने साथ रहने के कई सपने
उसका साथ और वो दोपहर सब याद आता है
गली में जहा बचपन में ही हम राजा रानी थे
वो बालू से बना महल सब याद आता है
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